मोबाइल दिला सकती है आदिवासी सूरों को पहचान

अगर भारत को भाषाओं की धरोहर का खजाना कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति न होगी। विश्व के नक्शे पर शायद भारत ही एक ऐसा देश है जहां हर कोस पर भाषा में अलग रंगत, अलग अंदाज नज़र आता है, उनमें से एक है भाषा गोंडी। 2011 जनगणना में पाया गया कि देश में करीब 30…

मोबाइल पर स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा, सशक्तिकरण का कारगर हथियार

1950 में इंटरनेट की शुरुआत हुई तो इंटरनेट की दुनिया में क्रांति आते-आते चार दशकों का वक्त लग गया। मगर जब क्रांति आई तो इसका सकारात्मक असर पूरी दुनिया पर नज़र आया। जिसके चलते संचार के क्षेत्र में भी अप्रत्याशित बदलाव हमें देखने को मिले। एक क्लिक पर आपके हाथ विश्व की जानकारियों, संस्कृतियों का…

mBillionth award 2014 press release

This year’s award, held on 18th of July, 2014, was graced by the presence of dignitaries from various countries and fields, who all were in praise of the thought process implied, the services being offered and the thus bridged gaps of our everyday lives. The award, which was hotly competed for, by almost 300 entries…

भारत के गांवों को भी चाहिए ‘गुईफाई डॉट नेट’

मार्शल मैकलुहान ने ग्लोबल विलेज की जब धारणा पेश की तो ज्यादातर विचारकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया । लेकिन, आज सारी दुनिया में ग्लोबल विलेज की धारणा का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि, अबतक बतौर ग्लोबल विलेज पूरी दुनिया को बांधने का काम, अगर किसी ने किया है तो वो है…

संपर्क सेतू – स्वस्थ गांव और स्वस्थ देश की अचूक कड़ी

आज से ठीक 3 साल पहले 2011 के जनवरी महीने में ब्रिटेन की मशहूर विज्ञान पत्रिका ‘लैंसेट’ की रिपोर्ट छपी थी। जिसमें कहा गया था कि अगर भारत ने अपनी तेज़ी से बढ़ती आबादी के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया तो देश का आर्थिक विकास ख़तरे में पड़ सकता है। रिपोर्ट में ये भी कहा…

सूचना और तकनीक से साकार हो सकते हैं बापू के अधूरे सपने !

विरासत यानी धरोहर को अगर आसान लहजे में बताना हो तो मैं कहूंगा कि ये एक बेशकीमती और  बहुत जल्दी नष्ट न होने वाला ऐसा खजाना है, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सौगाद के रूप में पहुंचता है। वैसे भी हर शख्स अपने निजी और पारिवारिक जिंदगी में विरासत की अहमीयत को बखूबी जानते…

MSBC workshop to be held in Bhopal

First MSBC Consultation to be held in Bhopal on 17-18 June 2014 The rapid growth of mobiles and the Internet have changed the way in which communication and development are taking place globally. It is strongly perceived that mobile, as a tool for social and behavioural change is an emerging area of importance among stakeholders…