प्राकृतिक संपदा संरक्षण के लिए आदिवासियों ने मोबाइल को बनाया हथियार

अगर कोई बच्चा पूंजीपति या उच्च जाति के परिवार में पैदा हो जाए तो वो पूंजीपति, राजनेता या फिर पत्रकार बन जाता है, राजस्थान, पंजाब में गरीब परिवार में पैदा होता है तो फौज में जाता है और वही एक बच्चा जब झारखंड, छत्तीसगढ़ के आदिवासी के घर में पैदा होता है तो वो जंगलों…

सशक्त नारी से ही बनेगा सशक्त समाज

आज के माहौल में महिला सशक्तिकरण की बात करने से पहले हमें इस सवाल का जवाब ढूंढना जरूरी है कि क्या वास्तव में महिलायें अशक्त हैं ? कहीं ऐसा तो नहीं कि अनजाने में या स्वार्थ के लिए उन्हें किसी साजिश के तहत कमजोर दिखाने की कोशिश हो रही है? इतिहास गवाह है कि मानव…

कालबेलिया जनजाति आज भी किसी जादू के इंतजार में

वैसे तो घुमंतू संपेरा जनजाति और पंचसितारा होटल का कोई रिश्ता तो नहीं, लेकिन 18 जुलाई की शाम एमबिलियंथ अवॉर्ड्स समारोह के दौरान दिल्ली के एक पंचसितारा होटल में जिसतरह इस जनजाति ने कालबेलिया नृत्य के जरिए शमां बांधा उसे देखने वाले भौंचक्के रह गए। दरअसल, कालबेलिया, राजस्थान में सपेरा जाति की एक मशहूर नृत्य…

ग्रामीण पर्यटन को नई सोच और तकनीक की जरूरत

अबतक लोगों को किसी चीज की खबर जानने के लिए टीवी, पत्रिका, अखबार, रेडियो या इंटरनेट का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन, अब ऐसा नहीं है, समय के साथ-साथ अब धीरे-धीरे सब कुछ बदलने लगा है। सूचना, समाचार हो या विज्ञापन सबकी खबर अब मोबाइल देने लगा है। चूंकि इन दिनों मोबाइल हर किसी की…

मोबाइल के साथ गाँव चला शहर की चाल

देश के कोने-कोने में राशन उपलब्धता की सूचना हो या सरकारी स्कूलों के बच्चों की छात्रवृति की खबर, अब सभी तरह की खबरें चुटकियों में मिल जाते हैं। चाहे वो खेत में हलधर किसान हो या गांव में अपना परिवार छोड़ शहर के किसी कोने में मजदूरी करता नौवजान, सभी एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन यानी मोबाइल…

‘काश! पहाड़ खोदने के बजाए ‘ग्राम आधारित विकास’ पर ध्यान दिया होता’

उत्तराखंड में आसमान से बरसी आफत ने जबरदस्त तबाही मचाई है। खत्म होती जिंद‌गियां, उफनती नदियां और ताश के पत्ते की तरह बिखरते घर इसके गवाह हैं, जिसने आपदा प्रबंधन की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। उत्तराखंड ही नहीं आज यह पूरे देश की कड़वी सच्चाई है कि कहीं भी आपदा प्रबंधन…

टेलीग्राम को आखिरी सलाम

वैसे तो साल 2013 कई मायने में महत्वपूर्ण है, लेकिन खासकर सूचना तकनीक के क्षेत्र के लिए साल 2013 कुछ खास ही रहा है। इसी साल 1 जनवरी 2013 को इंटरनेट ने जहां अपने 30 साल पूरे कर लिए, वहीं परम्परागत कैमरे में इस्तेमाल होने वाली कोडैक्रोम फिल्मों से तस्वीरें विकसित करने वाली दुनिया की…

एक ऐसा गांव जहां हर घर की खाट खड़ी नहीं, उल्टी मिलेगी…

इस बार मैं एक तस्वीर के सहारे आपको देश के कुछ इलाकों की सच्चाई से रूबरू कराउंगा। आंध्र प्रदेश के एक गांव की तस्वीर, जिसमें समुद्र के किनारे मछली पकड़ने की जाल लिए बैठा मछुआरा, उड़ीसा के मुस्लिम बहुल इलाके में लोगों के बीच बैठे मुल्ला जी और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सीढी़नुमा खेत…

पहाड़ी इलाकों में विकास से ही पलायन पर काबू संभव

पहचान और विकास की चाह की वजह से पहाड़ों में जिस जनांदोलन की शुरुआत हुई थी, वो 12 साल में ही निरर्थक हो गया। आज विडंबना यह है कि अलगाव की वो काली छाया उत्तराखंड के पहाड़ों को आहिस्ता-आहिस्ता अपनी चपेट में ले रही है। जहां एक तरफ हमारा देश लगातार उन्नति औऱ विकास की…